October 20, 2013

वो तुम्हारा 'समय'...

What a life is it?You meet someone,love n like each other...and then this is changing time which brings life upside down!
"स्मृति के पट
 खोले 
बाहर देख रहा हूँ. 
इतने में 
धीरे से वर्षा आ जाती है,
 सब दृश्य अपने में  
समेट  कर 
एक पर्दा
 मेरे आगे तान देती है-
एक धुंधला जोड़ा 
दूर कहीं दूर 
दृष्टिगोचर होता है,और
 कुछ पीछे 
माध्यम गति में जाता   
एक झुके कंधो वाला वाला व्यक्ति;
दृश्य स्पष्ट होता है-
जोड़े मैं स्त्री 
'तुम' हो, 
तुम मुस्कराती हो. 
तुम्हारा साथी हँस  रहा है,
वो 'समय' है. 
झुके कंधो वाला 'मैं' हूँ. 
अपितु कहो-
मैं झुक कर देखता हुआ 
तुम्हारे उन पद चिन्हों से 
अपने पद 
मिला रहा हूँ,
जिनसे,कभी अपने पद मिला कर 
न चल सका था!"





2 comments:

  1. Wow...nice one...reflections of past and repentance beautifully worded out!

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    1. So thanks.Mine is a humble post on past!

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